चरैवेति..चरैवेति..

मन में मची धमाचौकड़ी को कलम के रास्ते निकालने की चाह ले के आया हूं आप सबके पास.......बस याद है इतना कि "चलते जाना है मीलों दूर तक, जिन्दगी की शाम ढलने के पहले".....

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Diwakar Mani


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